बेजान स्किनमिथक vs सचनियासिनामाइड

पुरुषों के लिए ग्लोइंग स्किन कैसे पाएँ: असल में क्या काम करता है

हर "7 दिन में ग्लो" वाली रील एक ही बात छोड़ देती है: ग्लो वो रोशनी है जो स्मूद, हाइड्रेटेड और एक जैसी स्किन से वापस लौटती है। रिसर्च के हिसाब से भारतीय पुरुषों में ये कैसे बनता है, और इसमें कितना समय लगता है, वो यहाँ है।

लेखक: Abhishek Jain 19 मिनट में पढ़ें
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मुंबई के एक धूप वाले अपार्टमेंट की बालकनी पर एक युवा भारतीय पुरुष का चित्र, चेहरा सुबह की रोशनी की ओर, स्किन स्मूद और एक जैसी

ग्लोइंग स्किन वो स्किन है जो स्मूद, हाइड्रेटेड और एक जैसे रंग की हो, ताकि उस पर पड़ने वाली रोशनी बिखरने की बजाय बराबर से वापस लौटे। ज़्यादातर भारतीय पुरुषों के लिए ये चार आदतों से आती है: दिन में दो बार हल्के हाथ से चेहरा धोएँ, विटामिन C या नियासिनामाइड वाला सीरम लगाएँ, मॉइस्चराइज़ करें, और हर एक दिन सनस्क्रीन लगाएँ। नींद और सब्ज़ियाँ भी मदद करती हैं, और बदलाव में करीब चार से बारह हफ़्ते लगते हैं, सात दिन नहीं।

शादियों के कार्ड आने शुरू हो गए हैं। RSVP और आउटफ़िट के बीच कहीं, शाम 4 बजे ऑफ़िस के वॉशरूम के शीशे में आपकी नज़र अपने चेहरे पर पड़ी। ये इतना थका हुआ क्यों दिख रहा है? फिर आपने "glowing skin for men" सर्च किया और एक रील मिली जो नींबू के साथ सात दिन में ग्लो का वादा कर रही थी।

हर फ़ंक्शन में एक बंदा ऐसा होता है जो हर फ़ोटो में फ़्रेश दिखता है। उसकी स्किन का रंग आपसे अलग नहीं है। अगली शादी में ध्यान से देखिए। उसकी स्किन ज़्यादा स्मूद है, ज़्यादा एक जैसी है, और गलत जगहों पर चमकती नहीं। पूरी ट्रिक बस इतनी है, और ये सीखी जा सकती है।

छोटा जवाब। ग्लो कोई रंग नहीं है। ये वो रोशनी है जो एक स्मूद, हाइड्रेटेड और एक जैसे रंग वाली सतह से बराबर से वापस लौटती है। इसे आप चार स्टेप्स से बनाते हैं। एक हल्का फेस वॉश, दिन में दो बार। एक ब्राइटनिंग सीरम, सुबह विटामिन C वाला या नियासिनामाइड (Niacinamide) वाला, जो विटामिन B3 का एक रूप है। एक हल्का मॉइस्चराइज़र। सनस्क्रीन, हर दिन। साथ में सात घंटे की नींद और ज़्यादा फल और सब्ज़ियाँ। रगड़ना बंद, नींबू बंद, और केमिस्ट से ली हुई कोई भी स्टेरॉयड क्रीम बंद। इसे चार से बारह हफ़्ते दीजिए।

ग्लोइंग स्किन असल में क्या है?

मुंबई के ट्रैफ़िक में एक हफ़्ता बिताने के बाद किसी कार के बोनट के बारे में सोचिए। वही पेंट, वही धूप, लेकिन वो फीका दिखता है क्योंकि धूल और छोटी-छोटी खरोंचें रोशनी को बिखेर देती हैं। उसे धोइए, वैक्स कीजिए, और वो फिर चमकने लगता है। स्किन भी ऐसे ही काम करती है। सतह पर जमी डेड सेल्स और रूखापन रोशनी को बिखेरते हैं। स्मूद, हाइड्रेटेड स्किन रोशनी को अंदर आने देती है और उसे बराबर से वापस लौटाती है।

इसे नापा जा सकता है। स्किन ऑप्टिक्स पर हुई एक स्टडी ने यही नापा। रूखी स्किन सतह पर ज़्यादा रोशनी बिखेरती है। मॉइस्चराइज़ की हुई स्किन कम बिखेरती है। रिसर्चर्स ने लिखा कि "स्किन के मॉइस्चराइज़ होने के साथ उसकी पारदर्शिता बढ़ी"। यानी ग्लो का पहला हिस्सा है आपकी स्किन की ऊपरी परत में पानी।

दूसरा हिस्सा है एक जैसा रंग। टैन, पुराने पिंपल के निशान और गहरे धब्बे सतह को तोड़ देते हैं। यही बोनट की खरोंचें हैं। भारतीय स्किन जल्दी टैन होती है और उस पर निशान आसानी से पड़ जाते हैं। इसलिए ये हिस्सा यहाँ किसी स्कैंडिनेवियन स्किनकेयर वीडियो से ज़्यादा मायने रखता है। फीकी, असमान स्किन के लिए बनी एक रेंज इसी समस्या पर काम करती है।

तीसरा हिस्सा है जो ऊपर बैठा है। T-zone का तेल ग्लो नहीं, चिकनी चमक (शाइन) लगता है। प्रदूषण एक परत चढ़ा देता है। पार्टिकुलेट मैटर, यानी दिल्ली की सर्दियों की हवा वाला PM2.5। IJDVL का एक रिव्यू बताता है कि ये हेयर फ़ॉलिकल्स के रास्ते स्किन में घुसता है। वहाँ ये ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करता है, जो सेल्स पर एक तरह की केमिकल घिसाई है। यही रिव्यू ट्रैफ़िक के कणों पर हुई एक स्टडी का हवाला देता है। जिन लोगों का एक्सपोज़र ज़्यादा था, उनके माथे और गालों पर 20% ज़्यादा पिगमेंट वाले धब्बे थे। पॉल्यूशन शील्ड वाला मॉइस्चराइज़र उस परत का एक जवाब है।

एक साफ़ चित्र जिसमें स्मूद, हाइड्रेटेड स्किन से बराबर लौटती रोशनी की तुलना रूखी, खुरदरी स्किन की सतह पर बिखरती रोशनी से की गई है
बाएँ, स्मूद और हाइड्रेटेड स्किन से बराबर लौटती रोशनी। दाएँ, वही रोशनी एक रूखी, असमान सतह पर बिखरती हुई। "फीकी" स्किन का मतलब यही दूसरी वाली है। (AI से बनी तस्वीर)

ग्लोइंग स्किन के लिए असल में क्या काम करता है: सबूत

असली चेहरों पर हुए ट्रायल्स में ये मिला। हर लाइन में स्ट्रेंथ और समय दोनों लिखे हैं।

  • सनस्क्रीन, SPF 30। एक साल तक रोज़ इस्तेमाल से टेक्सचर, क्लैरिटी और धब्बेदार पिगमेंटेशन में 40% से 52% तक सुधार हुआ।
  • विटामिन C। 31 ट्रायल्स में धूप से होने वाली पिगमेंटेशन कम हुई। 7 ट्रायल्स के एक रिव्यू में ट्रीट की गई स्किन ज़्यादा स्मूद थी।
  • नियासिनामाइड। 5% ने 12 हफ़्तों में डार्क स्पॉट्स और पीलापन कम किया। 2% ने 4 हफ़्तों में तेल कम किया।
  • ग्लाइकोलिक एसिड (Glycolic acid)। 5% वाली एक क्रीम ने 3 महीनों में टेक्सचर और रंग के धब्बों (डिसकलरेशन) में सुधार किया।
  • मॉइस्चराइज़र। हाइड्रेटेड स्किन कम रोशनी बिखेरती है और ज़्यादा पारदर्शी दिखती है।
  • नींद। 31 घंटे जागने के बाद, वही चेहरे अजनबियों को कम सेहतमंद लगे।
  • फल और सब्ज़ियाँ। रोज़ करीब 3 हिस्से (पोर्शन) ज़्यादा खाने से 6 हफ़्तों में स्किन का रंग बदला।

सनस्क्रीन सबसे पहले आता है, और ये बात लोगों को हैरान करती है। एक साल की स्टडी में, 32 वयस्कों ने हर दिन चेहरे पर SPF 30 सनस्क्रीन लगाया। इसके अलावा कुछ भी नया नहीं था। टेक्सचर, क्लैरिटी और धब्बेदार पिगमेंटेशन में 40% से 52% तक सुधार हुआ। हर व्यक्ति की क्लैरिटी और टेक्सचर में सुधार हुआ। ये एक अमेरिकी स्टडी है, बिना कंट्रोल ग्रुप के, और इसे एक सनस्क्रीन बनाने वाली कंपनी ने करवाया था। इसे थोड़ा संभलकर पढ़िए। लेकिन दिशा साफ़ है। धूप ही वो चीज़ है जो हर दिन आपकी स्किन को फीका कर रही है। नुकसान रोकिए, और स्किन अपने आप एक जैसी होने लगती है।

विटामिन C टैन और असमान रंग के लिए सुबह का एक्टिव है। 31 ट्रायल्स के एक मेटा-एनालिसिस ने स्किन टाइप III वाले 741 गोरे और चीनी वॉलंटियर्स का डेटा एक साथ जोड़ा। विटामिन C ने UV से होने वाली पिगमेंटेशन कम की। डोज़ जितनी ज़्यादा, असर उतना बड़ा। 2023 के एक सिस्टमैटिक रिव्यू में सात ट्रायल्स और 139 वॉलंटियर्स शामिल थे। ट्रीट की गई स्किन "ज़्यादा स्मूद दिखी"। जहाँ विटामिन C लगाया गया, वहाँ मशीन से नापी गई पिगमेंट की रीडिंग काफ़ी गिरी। लेखकों ने कहा कि इसे देखने के लिए लंबे समय तक इस्तेमाल की ज़रूरत पड़ सकती है। THERŌ का ब्राइटनिंग सीरम 10% स्टेबलाइज़्ड विटामिन C के साथ कोजिक एसिड (Kojic Acid) और अल्फ़ा आर्बुटिन (Alpha Arbutin) लिए हुए है। करीब 4 हफ़्तों में स्किन साफ़ तौर पर ज़्यादा ब्राइट और एक जैसी दिखती है। कोजिक एसिड और अल्फ़ा आर्बुटिन, दोनों उस एंज़ाइम को धीमा करते हैं जो पिगमेंट बनाता है। एक भारतीय ट्रायल में स्किन टाइप III से IV वाली 120 महिलाओं पर 2% अल्फ़ा आर्बुटिन टेस्ट किया गया। उन्होंने इसे 90 दिनों तक दिन में दो बार सनस्क्रीन के साथ लगाया। उनके डार्क स्पॉट्स में मेलानिन 16.3% घटा। किसी ने खुजली या जलन की शिकायत नहीं की। इसका खर्च बनाने वाली कंपनी ने उठाया था और कोई कंट्रोल ग्रुप नहीं था। इसे सेफ़्टी का एक संकेत और एक दिशा मानिए, वादा नहीं।

नियासिनामाइड उन पुरुषों का एक्टिव है जिनका फीकापन तेल और निशानों के साथ आता है। 12 हफ़्ते के एक स्प्लिट-फेस ट्रायल में, 50 गोरी महिलाओं ने दिन में दो बार 5% नियासिनामाइड लगाया। इससे डार्क स्पॉट्स, लाल चकत्ते और पीलापन कम हुआ। एक और ट्रायल में चेहरे पर टैनिंग वाले 120 जापानी लोगों को फ़ॉलो किया गया। 4 हफ़्ते बाद, सनस्क्रीन के साथ 2% नियासिनामाइड ने अकेले सनस्क्रीन को पीछे छोड़ दिया। ये पिगमेंट के पैकेट्स को ऊपरी सेल्स तक पहुँचने से रोककर काम करता है। और 100 जापानी वॉलंटियर्स में, 2 हफ़्तों के अंदर 2% नियासिनामाइड ने तेल बनना कम कर दिया। ऑयली स्किन के लिए बना 5% नियासिनामाइड सीरम इसे दो एसिड्स के साथ मिलाता है। सैलिसिलिक एसिड (Salicylic acid) बंद पोर्स को साफ़ करता है। मैंडेलिक एसिड (Mandelic acid) एक हल्का एक्सफ़ोलिएटिंग एसिड है।

ग्लाइकोलिक एसिड एक्सफ़ोलिएटर है। ये गन्ने से बनने वाला एक AHA है। Cleveland Clinic के एक डर्मेटोलॉजिस्ट कहते हैं कि ये "उस जुड़ाव को ढीला करने में मदद करता है जो सतह पर डेड स्किन सेल्स को आपस में जोड़े रखता है"। 3 महीने के एक ट्रायल में, 75 वॉलंटियर्स ने रोज़ 5% ग्लाइकोलिक एसिड क्रीम लगाई। प्लेसिबो के मुकाबले टेक्सचर और डिसकलरेशन में काफ़ी सुधार हुआ। 12 हफ़्ते की एक स्टडी में स्किन टाइप II से VI वाली अमेरिकी महिलाओं पर 10% ग्लाइकोलिक एसिड इमल्शन इस्तेमाल किया गया। 4वें हफ़्ते से टेक्सचर, पिगमेंटेशन और रंग की एकरूपता में सुधार हुआ। इसे पाने का सबसे आसान तरीका है ग्लाइकोलिक एसिड वाला फेस वॉश। ये धुल जाता है और पूरे दिन स्किन पर नहीं बैठा रहता।

नींद और खाना कोई ऑप्शनल एक्स्ट्रा नहीं हैं। BMJ के एक एक्सपेरिमेंट में 23 वयस्कों की दो बार फ़ोटो ली गई। एक बार 8 घंटे की नींद के बाद, एक बार 31 घंटे जागने के बाद। 65 अजनबियों ने थके हुए चेहरों को रेट किया। कम सेहतमंद, ज़्यादा थके हुए, कम आकर्षक। छह हफ़्ते की एक डाइट स्टडी में 35 गोरे वॉलंटियर्स को फ़ॉलो किया गया। रोज़ करीब 3 हिस्से ज़्यादा फल और सब्ज़ियाँ खाने से उनकी स्किन का रंग बदल गया। ये बदलाव कैरोटिनॉयड्स (carotenoids) से आया। ये वो नारंगी-पीले पिगमेंट हैं जो गाजर, पपीते और पालक में होते हैं। इसी ग्रुप के पहले के काम में लोगों से चेहरों को ज़्यादा सेहतमंद दिखाने को कहा गया। उन्होंने टैन नहीं, कैरोटिनॉयड वाला रंग जोड़ा। इस रिसर्च का ज़्यादातर हिस्सा हल्की स्किन पर हुआ। भारतीय स्किन पर असर कितना बड़ा है, ये पता नहीं है। दिशा फिर भी वही रहती है।

एक भारतीय सब्ज़ी मंडी में ढेर में रखी ताज़ी हरी भिंडी (okra) का क्लोज़-अप
ग्लोइंग स्किन का "सुपरफ़ूड" वही सब्ज़ी है जो पहले से आपके फ़्रिज में रखी है। रोज़ तीन हिस्से ज़्यादा खाने से छह हफ़्तों में स्किन का रंग बदला। (फ़ोटो क्रेडिट: Nishanth Jois, Flickr, CC BY 2.0)

पुरुषों के लिए ग्लोइंग स्किन रूटीन: 4 स्टेप्स, सुबह और रात

चार स्टेप्स। क्लीन्ज़, ट्रीट, मॉइस्चराइज़, प्रोटेक्ट। सुबह तीन मिनट, रात को दो।

सुबह

  1. क्लीन्ज़। चेहरा गुनगुने पानी से गीला करें। एक सिक्के जितना विटामिन C और ग्लाइकोलिक एसिड वाला ब्राइटनिंग फेस वॉश हथेलियों के बीच रगड़ें। उंगलियों से 30 सेकंड तक चेहरे पर मसाज करें। धोएँ, थपथपाकर सुखाएँ। अगर स्किन ऑयली है, तो इसकी जगह नियासिनामाइड और सैलिसिलिक एसिड वाला फेस वॉश इस्तेमाल करें।
  2. ट्रीट। विटामिन C सीरम की 3 से 5 बूँदें हथेली पर लें। सपाट हथेलियों से इसे चेहरे और गर्दन पर दबाकर लगाएँ। इसे सोखने के लिए एक मिनट दें। अगर आपकी मुख्य समस्या तेल और पिंपल के निशान हैं, तो यहाँ इसकी जगह नियासिनामाइड सीरम आता है।
  3. मॉइस्चराइज़। मटर के दाने जितना कोजिक एसिड और अल्फ़ा आर्बुटिन वाला हल्का मॉइस्चराइज़र। इसमें DustShield™ भी है। ये PM2.5 जैसे बहुत बारीक प्रदूषण के कणों के खिलाफ़ एक बैरियर बनाने में मदद करता है। ऑयली स्किन वाले इसकी जगह सैलिसिलिक एसिड वाला मॉइस्चराइज़र लें।
  4. प्रोटेक्ट। सनस्क्रीन, SPF 30 या उससे ज़्यादा, ब्रॉड स्पेक्ट्रम। AAD कहता है कि चेहरे के लिए कम से कम एक टीस्पून, और बाहर हों तो करीब हर दो घंटे में दोबारा लगाएँ। हाँ, बाइक पर भी। हाँ, अक्टूबर में भी। 80% तक UV बादलों के पार आ जाती है।

रात

  1. क्लीन्ज़। वही फेस वॉश। यही वॉश सबसे ज़्यादा मायने रखता है, क्योंकि ये दिन भर का पसीना, सनस्क्रीन और दिल्ली, सब उतार देता है।
  2. ट्रीट। अगर आप नियासिनामाइड सीरम लगाते हैं, तो वो। अगर आपको रात में पसंद है तो विटामिन C भी यहाँ लग सकता है, लेकिन ज़्यादातर पुरुषों के लिए सुबह बेहतर समय है।
  3. मॉइस्चराइज़। वही मॉइस्चराइज़र। रात में स्किन से पानी उड़ता है, और रूखी सतह यानी फीकी सतह।

कोई भी नया सीरम पूरे चेहरे पर लगाने से पहले दो रात जबड़े पर पैच टेस्ट करें। एक बार में एक ही नया एक्टिव जोड़ें, एक हफ़्ते के फ़ासले पर। अगर कोई चीज़ एक मिनट से ज़्यादा चुभे, या स्किन लाल हो जाए और लाल ही रहे, तो उसे बंद कर दें।

एक चमकदार मॉडर्न बाथरूम में शीशे में देखते हुए सपाट हथेलियों से गालों पर सीरम दबाकर लगाते एक भारतीय पुरुष का चित्र
उंगलियाँ नहीं, सपाट हथेलियाँ, और मॉइस्चराइज़र से पहले एक मिनट का सब्र। पूरे रूटीन में उससे कम समय लगता है जितना एक रील चुनने में। (AI से बनी तस्वीर)

ग्लोइंग स्किन के लिए भारतीय पुरुषों की आम गलतियाँ

रगड़-रगड़कर ग्लो लाना। अखरोट वाले स्क्रब, खुरदरे तौलिये, पीठ के लिए बना लूफ़ा। AAD इस पर सीधी बात करता है। अगर आपकी स्किन का रंग गहरा है तो तेज़ स्क्रब से बचें। ज़ोरदार एक्सफ़ोलिएशन से और ज़्यादा डार्क स्पॉट्स हो सकते हैं। ज़रूरत से ज़्यादा एक्सफ़ोलिएट करने से स्किन लाल और इरिटेट हो जाती है। लाली ग्लो नहीं है। हल्के एसिड वाला एक जेंटल फेस वॉश बिना रेगमाल के ये काम कर देता है।

साबुन की एक टिकिया। उसी से बाल, चेहरा, शरीर धुलते हैं, और बुरे दिन बाथरूम का फ़र्श भी। केरल की एक लैब स्टडी ने 64 भारतीय नहाने के साबुनों को नापा। 53 का pH 9 से 10 के बीच था, जबकि सेहतमंद स्किन 5.4 से 5.9 पर रहती है। सिर्फ़ दो स्किन से मेल खाते थे। पुरुषों के लिए AAD की सलाह भी यही कहती है: साबुन की टिकिया में अक्सर तेज़ चीज़ें होती हैं जो स्किन को रूखा कर देती हैं। रूखी स्किन रोशनी बिखेरती है। आप जिसके लिए आए थे, ये ठीक उसका उल्टा है।

दिन में पाँच बार धोना। ज़्यादा धोने का मतलब है ज़्यादा तेल, कम नहीं, और ज़्यादा इरिटेशन। AAD कहता है दिन में दो बार और पसीने के बाद, उंगलियों से, बिना रगड़े, गुनगुने पानी से। ऑयली स्किन को अलग फेस वॉश चाहिए, ज़्यादा बार धोना नहीं।

नींबू। नींबू और लाइम के रस में ऐसे केमिकल होते हैं जो धूप के साथ रिएक्ट करते हैं। DermNet इस रिएक्शन के बारे में बताता है। धूप में जाने के 24 से 48 घंटे बाद जलन (बर्न) दिखती है। उसके बाद एक काला निशान आता है, जो "सालों तक रह सकता है"। सांवली स्किन में ये और तेज़ होता है। नींबू की जगह पानी के गिलास में है, बाइक राइड से पहले आपके गाल पर नहीं।

केमिस्ट से ली "फ़ेयरनेस" और स्टेरॉयड क्रीम। ये सबसे गंभीर वाली है। 12 सेंटर्स वाली एक भारतीय स्टडी में चेहरे की समस्याओं वाले 2,926 लोगों की जाँच हुई। इनमें से 433 (14.8%) चेहरे पर स्टेरॉयड क्रीम लगा रहे थे। सबसे आम वजह थी इसे फ़ेयरनेस क्रीम या हर काम की क्रीम की तरह इस्तेमाल करना। लगभग 60% ने इसे किसी गैर-डॉक्टर की सलाह पर लगाया था, और 90.5% को साइड इफ़ेक्ट्स हुए, जिनमें सबसे आम था एक्ने। AAD एक चेतावनी और जोड़ता है। डार्क स्पॉट्स के लिए बिकने वाले कुछ प्रोडक्ट्स में स्टेरॉयड या मरकरी (पारा) था, जो लेबल पर लिखा नहीं था। अगर आपने जो सर्च किया उसमें "fair" या "gora" था, तो ईमानदार जवाब ये है। ग्लो कोई शेड नहीं है। जो प्रोडक्ट्स आपको ज़्यादा ब्राइट और एक जैसी स्किन देते हैं, वो आपका रंग नहीं बदलते। वो उसके ऊपर जमे टैन, निशान और रूखेपन को साफ़ करते हैं।

10 स्टेप वाला रूटीन। Cleveland Clinic के एक डर्मेटोलॉजिस्ट साफ़ कहते हैं। "दस स्टेप्स बहुत होते हैं।" किसी को दस स्टेप्स दीजिए, वो दो या तीन ही करेगा। जो चार स्टेप्स आप सच में करते हैं, वो उन दस से बेहतर हैं जिन्हें आप गुरुवार तक छोड़ देते हैं।

पहले ही दिन कई एक्टिव्स एक साथ शुरू करना। विटामिन C, ग्लाइकोलिक वॉश, नियासिनामाइड सीरम और एक नया स्क्रब, सब एक ही रविवार को शुरू। फिर चेहरा चुभने लगता है और पूरे रूटीन को दोष मिलता है। हफ़्ते में एक नया एक्टिव। विटामिन C और नियासिनामाइड साथ में इस्तेमाल हो सकते हैं, बस दोनों को एक ही दिन शुरू मत कीजिए।

ग्लोइंग स्किन पाने में कितना समय लगता है?

ऊपर की स्टडीज़ से ईमानदार टाइमलाइन।

  • आज रात: मॉइस्चराइज़ की हुई सतह कम रोशनी बिखेरती है। कल सुबह शीशे में आपको हल्का सा फ़र्क दिखेगा। वो हाइड्रेशन है, नतीजा नहीं।
  • एक रात की अच्छी नींद: BMJ स्टडी में अजनबियों ने आराम किए हुए चेहरों को ज़्यादा सेहतमंद बताया। ये भी मुफ़्त है।
  • 4 हफ़्ते: जापानी ट्रायल में नियासिनामाइड ने 4 हफ़्तों में टैन पिगमेंट कम किया। ग्लाइकोलिक एसिड ने 4वें हफ़्ते से रंग में सुधार किया। THERŌ के विटामिन C सीरम से करीब 4 हफ़्तों में स्किन साफ़ तौर पर ज़्यादा ब्राइट और एक जैसी दिखती है। एक कंज़्यूमर स्टडी में 95% ने ज़्यादा ब्राइट स्किन महसूस की, ये यूज़र्स ने खुद बताया, लैब में नापा नहीं गया।
  • 6 हफ़्ते: डाइट का बदलाव स्किन के रंग में दिखा।
  • 12 हफ़्ते: नियासिनामाइड, ग्लाइकोलिक और विटामिन C के ट्रायल्स नतीजा बताने से पहले 12 हफ़्ते चले। सनस्क्रीन वाली स्टडी में 52 हफ़्तों तक सुधार होता रहा।
  • 6 से 12 महीने: एक डार्क स्पॉट के हल्का होने के लिए AAD की बताई रेंज।

तो "7 दिन में ग्लो" असल में हाइड्रेशन का नतीजा है जिसे ट्रांसफ़ॉर्मेशन बनाकर दिखाया जाता है। आपकी स्किन की बाहरी परत को इस प्लान की खबर लगने में ही एक हफ़्ते से ज़्यादा लगता है। पहले दिन एक ही रोशनी में फ़ोटो लें, और चौथे और बारहवें हफ़्ते पर मिलाएँ। रास्ते में प्रदूषण का मौसम और टैन आपसे लड़ेंगे, इसलिए रूटीन एक आदत है, कोई कोर्स नहीं।

डर्मेटोलॉजिस्ट को कब दिखाना चाहिए?

तब जाइए जब:

  • कोई फीका या गहरा धब्बा फैल रहा हो, उसका किनारा साफ़ हो, या वो दोनों गालों पर शीशे की तरह एक जैसे पैटर्न में हो। ये मेलास्मा या फ़ंगल पैच हो सकता है, और कोई भी सीरम इनमें से किसी को ठीक नहीं करता।
  • आप चेहरे पर स्टेरॉयड क्रीम लगा रहे हैं, या केमिस्ट की कोई ऐसी क्रीम जो चुभती है या जिससे दाने निकल आए। उसे बंद कीजिए और डॉक्टर को दिखाइए।
  • नए प्रोडक्ट्स शुरू करने के बाद आपका चेहरा लाल है, जल रहा है या छिल रहा है, और एक हफ़्ते में ठीक नहीं हुआ।
  • 12 हफ़्ते सनस्क्रीन और सही रूटीन के बाद भी कुछ नहीं बदला।
  • आपको गहरे, दर्द वाले पिंपल्स होते हैं जो बार-बार निशान छोड़ जाते हैं। उन्हें रोकना ही एक जैसी स्किन का सबसे तेज़ रास्ता है।

डर्मेटोलॉजिस्ट के पास प्रिस्क्रिप्शन वाले टूल्स होते हैं, जैसे रेटिनॉयड्स, हाइड्रोक्विनोन और क्लिनिक पील्स। ये प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिलते हैं, और इसकी वजह है। इन्हें बिना पर्ची के मत खरीदिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

7 दिन में नैचुरली ग्लो कैसे पाएँ?

सात दिन में आप हाइड्रेशन, नींद और सनस्क्रीन ठीक कर सकते हैं, और ये तीनों बदल देते हैं कि शीशे में आपका चेहरा कैसा दिखता है। सात दिन में आप टैन, डार्क स्पॉट्स या टेक्सचर नहीं बदल सकते। जिन ट्रायल्स ने इन्हें नापा, वो 4 से 12 हफ़्ते चले। आज ही चार स्टेप वाला रूटीन शुरू कीजिए और चौथे हफ़्ते पर उसे परखिए।

कोरियाई स्किन में ग्लो कैसे आता है?

कोई कोरियाई ट्रिक नहीं है। Cleveland Clinic के डर्मेटोलॉजिस्ट कहते हैं कि कोरियाई रूटीन के हर स्टेप में हाइड्रेशन का एक हिस्सा होता है। और ये हमेशा सनस्क्रीन पर खत्म होता है। बस इतना ही: हाइड्रेशन, धूप से बचाव और लगातार करना, एक ऐसे देश में जहाँ सनस्क्रीन आम बात है। ये तीनों मुंबई में भी मिलते हैं। एक हल्का मॉइस्चराइज़र और रोज़ का SPF आपको ज़्यादातर रास्ता तय करा देते हैं।

ग्लास स्किन क्या है, और क्या पुरुषों को मिल सकती है?

"ग्लास स्किन" एक कोरियाई स्किनकेयर शब्द है, ऐसी स्किन के लिए जो स्मूद, साफ़ और चमकदार दिखे। इसके पीछे का रूटीन सीधा है। एक केमिकल एक्सफ़ोलिएंट, एक हाइड्रेटिंग सीरम, सनस्क्रीन, और ये सब हर दिन करना। आपकी स्किन काँच नहीं है। उसमें पोर्स हैं और दाढ़ी के बाल हैं, और उन्हें वहीं होना चाहिए। एक जैसी और हाइड्रेटेड स्किन का लक्ष्य रखिए, फ़ोटोज़ अपने आप अच्छी आएँगी।

स्किनकेयर में 4-2-4 रूल क्या है?

चेहरा धोने का एक वायरल तरीका। चार मिनट क्लींज़िंग ऑयल, दो मिनट फ़ोम फेस वॉश, चार मिनट धोना। सिंक पर दस मिनट, दिन में दो बार। कोई भी डर्मेटोलॉजी संस्था इस टाइमिंग की सलाह नहीं देती। AAD की सलाह है दिन में दो बार, उंगलियों से, हल्के हाथ से धोना। सही फेस वॉश से 30 सेकंड का वॉश काम कर देता है।

ग्लोइंग स्किन के लिए नंबर एक फल कौन सा है?

कोई खास फल नहीं। छह हफ़्ते वाली स्टडी में पाया गया कि कुल मात्रा मायने रखती है, फल नहीं। रोज़ करीब तीन हिस्से ज़्यादा खाने से स्किन का रंग बदला। ये रंग कैरोटिनॉयड्स से आया। गाजर, पपीता, आम, टमाटर और पालक, सब इनसे भरे हैं। जो अंकल कहते हैं कि कोई एक खास फल है, उन्होंने वो पेपर नहीं पढ़ा।

कौन से दो सीरम साथ में इस्तेमाल नहीं कर सकते?

इस आर्टिकल के एक्टिव्स के लिए समस्या जोड़ी नहीं, टाइमिंग है। विटामिन C और नियासिनामाइड साथ में ठीक काम करते हैं। दिक्कत एक ही हफ़्ते में तीन चीज़ें शुरू करने से आती है। ग्लाइकोलिक वॉश, विटामिन C सीरम और नियासिनामाइड सीरम। चेहरे ऐसे ही लाल होते हैं। एक बार में एक सीरम शुरू कीजिए, एक हफ़्ते के फ़ासले पर, और इनमें से किसी के भी साथ सनस्क्रीन लगाते रहिए।

क्या 25 की उम्र में शुरू करना बहुत देर है?

नहीं। ऊपर के ट्रायल्स 18 से 50 साल के वयस्कों पर हुए, और सनस्क्रीन वाली स्टडी में एक साल पूरा होने पर भी सुधार दिख रहा था। भारतीय स्किन पर टैन और निशान किसी भी उम्र में सुधरते हैं। जो चीज़ देर से होती जाती है, वो बस शुरू करने की तारीख है।

पुरुषों के लिए ग्लोइंग स्किन: आख़िरी बात

ग्लो एक स्मूद, हाइड्रेटेड, एक जैसी सतह पर पड़ती रोशनी है। आज रात: एक जेंटल फेस वॉश से धोएँ, मॉइस्चराइज़ करें, और सात घंटे सोएँ। कल सुबह: क्लीन्ज़, विटामिन C सीरम, मॉइस्चराइज़र, सनस्क्रीन। नींबू वापस किचन में रखिए और स्क्रब डस्टबिन में डालिए। एक फ़ोटो लीजिए। चार हफ़्ते बाद फिर देखिए, फिर बारह हफ़्ते बाद। जो बंदा हर शादी की फ़ोटो में फ़्रेश दिखता है, उसने ठीक यही किया, कुछ महीनों तक, और किसी को बताया नहीं।

संदर्भ

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