पुरुषों के अच्छे स्किनकेयर रूटीन में चार स्टेप होते हैं: चेहरा धोइए, अपनी मुख्य समस्या के लिए एक प्रोडक्ट लगाइए, मॉइस्चराइज़ कीजिए, और दिन में सनस्क्रीन लगाइए। सुबह और रात, बस कुछ मिनट लगते हैं। स्किन को खुद को नया करने में लगभग एक महीना लगता है, इसलिए रूटीन को हफ़्तों में परखिए, सात दिन में नहीं।
शाम के 4 बजे हैं। आप ऑफ़िस के वॉशरूम में हैं। शीशे में माथा इतना चमक रहा है कि हवाई जहाज़ को रास्ता दिखा दे।
सुबह आपने चेहरा धोया था। उसी साबुन की टिकिया से, जिससे बाल और बदन भी धोए। उसने आज तक एक बार भी शिकायत नहीं की।
तो आप सर्च करते हैं "पुरुषों के लिए स्किनकेयर रूटीन"। इंटरनेट आपको दस स्टेप, टोनर की सात परतें और दस मिनट का फेस वॉश थमा देता है। और आपकी 9:30 की मीटिंग है।
छोटा जवाब ये है। आपको चार स्टेप चाहिए।
- क्लेंज़। साबुन से नहीं, फेस वॉश से चेहरा धोइए।
- ट्रीट। अपनी मुख्य समस्या के लिए एक प्रोडक्ट लगाइए।
- मॉइस्चराइज़। हाँ, ऑयली स्किन हो तब भी।
- प्रोटेक्ट। दिन में सनस्क्रीन लगाइए।
चारों स्टेप सुबह कीजिए और पहले तीन रात को। अब जानिए कि भारतीय चेहरे पर हर स्टेप अपनी जगह क्यों कमाता है।
पुरुषों की स्किन महिलाओं की स्किन से कैसे अलग है?
शुरुआत स्किन की सबसे ऊपरी परत से कीजिए। इसे ईंट की दीवार समझिए। डेड स्किन सेल्स ईंटें हैं। नैचुरल फ़ैट सीमेंट है। अमेरिका की एक मेडिकल रेफ़रेंस इस ईंट-और-गारे वाली परत को शरीर की पहली सुरक्षा पंक्ति कहती है। ये पानी को अंदर और बाहर की दुनिया को बाहर रखती है।
इस दीवार को याद रखिए। नीचे का हर स्टेप इसे साफ़ करता है, इसकी मरम्मत करता है या इसे बचाता है।
दीवार के नीचे ऑयल ग्लैंड्स होते हैं। ये सीबम बनाते हैं, यानी वो तेल जो आपकी स्किन खुद बनाती है। मेल हार्मोन इन ग्लैंड्स को चालू करते हैं। डर्मेटोलॉजी रेफ़रेंस DermNet कहता है कि वयस्क पुरुष, वयस्क महिलाओं से थोड़ा ज़्यादा तेल बनाते हैं। "थोड़ा" शब्द पर ध्यान दीजिए। जो कहे कि पुरुष दोगुने ऑयली होते हैं, वो बस अंदाज़ा लगा रहा है।
पुरुषों की स्किन मोटी भी होती है। 57 स्टडीज़ के एक 2018 के रिव्यू में स्कैन वाली एक स्टडी का ज़िक्र है, जिसमें 88 लोग थे। उसमें पुरुषों की स्किन 10 से 20% मोटी मिली। रिव्यू पुरुषों की स्किन को बड़े पोर्स से भी जोड़ता है। एक बात ध्यान रखिए: इनमें से किसी स्टडी में भारतीय पुरुष नहीं थे। अगर तेल आपकी सबसे बड़ी लड़ाई है, तो THERŌ की पूरी ऑयल कंट्रोल रेंज एक ही जगह मिलती है।
अब भारत वाली बात। गहरे रंग की स्किन के सन प्रोटेक्शन पर 2022 के एक रिव्यू के मुताबिक भूरी स्किन धूप में कम जलती है और ज़्यादा टैन होती है। उस पर निशान भी जल्दी पड़ते हैं। एक पिंपल या शेविंग का कट पीछे डार्क स्पॉट छोड़ सकता है। गहरे रंग की स्किन पर डार्क स्पॉट्स के एक रिव्यू में पाया गया कि ये ज़्यादा बार और ज़्यादा गहरे होते हैं। इन्हें मिटने में महीनों से सालों तक लग सकते हैं। उस रिव्यू में अमेरिका के मरीज़ थे, भारत के नहीं। इसी वजह से THERŌ की एक पूरी ज़्यादा ब्राइट और ईवन स्किन के लिए रेंज है।
पुरुषों की स्किन के लिए कौन से स्किनकेयर इंग्रीडिएंट्स काम करते हैं?
ज़्यादातर लेबल पर चार नाम दिखते हैं।
सैलिसिलिक एसिड बंद पोर्स को साफ़ करता है। ये तेल में घुल जाता है, इसलिए पोर के अंदर के तेल में मिल पाता है। श्रीनगर के एक डर्मेटोलॉजिस्ट का रिव्यू बताता है कि ये कैसे होता है, हालाँकि उसका डेटा क्लिनिक के स्ट्रॉन्ग पील्स से आता है। सैलिसिलिक एसिड आपको THERŌ के ऑयल कंट्रोल फेस वॉश में मिलेगा।
नियासिनामाइड विटामिन B3 का एक रूप है, और इसके पीछे असली क्लिनिकल डेटा है। एक ट्रायल में 2% नियासिनामाइड वाला मॉइस्चराइज़र 100 जापानी वॉलंटियर्स पर टेस्ट हुआ। आधे लोगों को डमी क्रीम दी गई। नियासिनामाइड वाले ग्रुप में दो हफ़्ते के अंदर तेल कम बना। चार हफ़्ते पर भी ये कमी बनी रही। स्किनकेयर में नियासिनामाइड पर 2024 के एक रिव्यू ने कई क्लिनिकल स्टडीज़ में यही पाया। उन स्टडीज़ में 2% से 5% नियासिनामाइड इस्तेमाल हुआ, एशियाई और यूरोपीय मूल के वॉलंटियर्स पर। रिव्यू ये भी कहता है कि स्किन नियासिनामाइड को अच्छे से झेल लेती है। ऑयली स्किन के लिए THERŌ 5% नियासिनामाइड वाला सीरम बनाता है।
विटामिन C एक एंटीऑक्सीडेंट है। ये फ़्री रेडिकल्स का सफ़ाया करता है, यानी वो अस्थिर मॉलिक्यूल जो धूप स्किन में बनाती है। ये मेलानिन बनने की रफ़्तार भी धीमी करता है, वो पिगमेंट जो टैन और डार्क स्पॉट्स के पीछे है। स्किन केयर में विटामिन C पर एक भारतीय रिव्यू बताता है कि सनस्क्रीन इन फ़्री रेडिकल्स में से सिर्फ़ 55% को रोकती है। इसलिए दोनों एक टीम की तरह काम करते हैं। एक दूसरा रिव्यू अच्छे प्रोडक्ट्स की स्ट्रेंथ 10 से 20% बताता है। दोनों रिव्यू शुद्ध विटामिन C की बात करते हैं। THERŌ का विटामिन C सीरम 10% स्टेबलाइज़्ड रूप इस्तेमाल करता है, इसलिए इन नंबरों को एक गाइड की तरह लीजिए।
ग्लाइकोलिक और लैक्टिक एसिड कई फेस वॉश और सीरम में होते हैं। AAD कहता है कि ये ऑयलीनेस कम करने में मदद कर सकते हैं, हालाँकि कुछ स्किन को ये तेज़ लगते हैं। AAD यानी American Academy of Dermatology। इन एसिड्स के साथ एक नियम आता है। अमेरिका की Food and Drug Administration कहती है कि ये धूप के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं। उसके टेस्ट में चार हफ़्ते बाद सेंसिटिविटी 18% बढ़ी। अगर आपके प्रोडक्ट्स में ये हैं, तो रोज़ सनस्क्रीन ऑप्शनल नहीं है।
दोनों THERŌ फेस सीरम एक ही पेज पर हैं।
पुरुषों के लिए सबसे अच्छा स्किनकेयर रूटीन कौन सा है?
सबसे अच्छा रूटीन वो है जो आप रोज़ करेंगे। Cleveland Clinic के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. आलोक विज अपने मरीज़ों को 10 स्टेप वाला रूटीन नहीं देते। वो कहते हैं, किसी को दस स्टेप दो, तो "वो शायद उनमें से दो या तीन स्टेप ही नियम से करेगा"। Harvard Health कहता है कि तीन आसान स्टेप काफ़ी हैं। THERŌ चार इस्तेमाल करता है।
स्टेप 1: क्लेंज़। चेहरे को गुनगुने पानी से गीला कीजिए। उंगलियों से फेस वॉश लगाइए। रगड़िए मत। धोइए और थपथपाकर सुखाइए। AAD की फेस वॉशिंग गाइड कहती है कि दिन में दो बार और ज़्यादा पसीने के बाद चेहरा धोइए। इसमें हेलमेट को पसीने की एक वजह बताया गया है, जो स्किन को इरिटेट करता है। अगर आप बाइक से ऑफ़िस जाते हैं, तो पहुँचकर चेहरा धोइए। ऑयली स्किन या पिंपल्स के लिए ऊपर वाला ऑयल कंट्रोल फेस वॉश लीजिए। डल, टैन वाली स्किन के लिए विटामिन C फेस वॉश लीजिए।
स्टेप 2: ट्रीट। सीरम एक पतला लिक्विड है जिसमें एक्टिव इंग्रीडिएंट्स होते हैं। साफ़ चेहरे और गर्दन पर 3 से 5 बूँदें लगाइए। यहाँ जानिए हर प्रोडक्ट कितना लगाना है, और एक बोतल कितने दिन चलती है। एक समस्या चुनिए और एक सीरम। तेल और पिंपल्स हैं, तो नियासिनामाइड। टैन और डार्क स्पॉट्स हैं, तो विटामिन C।
स्टेप 3: मॉइस्चराइज़। मॉइस्चराइज़र आपकी स्किन में पानी को रोककर रखता है। ये आपकी ईंट की दीवार का सीमेंट है। मॉइस्चराइज़र्स पर एक भारतीय रिव्यू कहता है कि चेहरे के प्रोडक्ट चिपचिपे नहीं होने चाहिए और पोर्स बंद नहीं करने चाहिए। ऑयली स्किन हो, तो उसके लिए बना एक हल्का मॉइस्चराइज़र है। डल स्किन के लिए विटामिन C मॉइस्चराइज़र है। दोनों में DustShield™ है, एक प्रोटेक्टिव परत जिससे बहुत बारीक कण कम आसानी से चिपकते हैं। दोनों डस्ट शील्ड कलेक्शन में मिलते हैं।
क्या शहर की धूल से फ़र्क पड़ता है? 70 से 80 साल की 400 जर्मन महिलाओं पर हुई एक स्टडी ने ट्रैफ़िक की कालिख को 20% ज़्यादा डार्क स्पॉट्स से जोड़ा। ये एक कनेक्शन है, सबूत नहीं, और किसी ने इसे दिल्ली में दोहराया नहीं है।
स्टेप 4: प्रोटेक्ट (सिर्फ़ सुबह)। ऐसी सनस्क्रीन चुनिए जिस पर SPF 30 या उससे ज़्यादा और "ब्रॉड स्पेक्ट्रम" लिखा हो। SPF बताता है कि सनस्क्रीन जलाने वाली किरणों को कितना अच्छा रोकती है। चेहरे के लिए AAD कहता है कम से कम एक टीस्पून लगाइए। यानी इंडेक्स फ़िंगर पर एक लाइन और मिडिल फ़िंगर पर एक लाइन। AAD कहता है कि बाहर हों, तो लगभग हर दो घंटे में दोबारा लगाइए। 14 भारतीय डर्मेटोलॉजिस्ट्स का 2025 का एक पैनल थोड़ा नरम रुख़ रखता है। सही मात्रा में लगाई हो, तो शायद आठ घंटे तक दोबारा लगाने की ज़रूरत न पड़े। पेच है पसीना। पसीना आए या चेहरा पोंछें, तो दोबारा लगाइए। उस पैनल को एक फ़ार्मा कंपनी ने फ़ंड किया था, इसलिए इसे एक्सपर्ट की राय की तरह लीजिए।
अगर आप शेव करते हैं, तो पहले स्किन और बाल गीले कीजिए। AAD की शेविंग गाइड कहती है कि बाल जिस दिशा में उगते हैं, उसी दिशा में शेव कीजिए। पाँच से सात शेव के बाद ब्लेड बदल दीजिए। फिर मॉइस्चराइज़ कीजिए।
कोई नया प्रोडक्ट शुरू करने से पहले, उसे टेस्ट कीजिए। AAD कहता है कि इसे सिक्के जितनी जगह पर लगाइए, बाँह के अंदर वाले हिस्से पर, दिन में दो बार, सात से दस दिन तक। लाली या खुजली नहीं हुई, तो आप सेफ़ हैं।
भारतीय पुरुष स्किनकेयर में कौन सी गलतियाँ करते हैं?
"डार्क स्किन को सनस्क्रीन की ज़रूरत नहीं।" ज़रूरत है। AAD कहता है कि धूप भूरी स्किन पर एजिंग को तेज़ करती है और उसके कुछ हिस्सों को गहरा कर सकती है। सैटेलाइट डेटा के मुताबिक मार्च से मई के बीच दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में साफ़ आसमान वाला UV इंडेक्स लगभग 9.5 से 13.8 के बीच रहता है। World Health Organization कहता है कि 8 और उससे ऊपर पर दोपहर की धूप से बचिए। फिर भी 2,037 भारतीय वयस्कों के एक सर्वे में 1,242 को सनस्क्रीन के बारे में कुछ नहीं पता था। पुरुषों और महिलाओं का स्कोर एक जैसा था। THERŌ की एक सन डैमेज रेंज भी है।
"साबुन तो साबुन है।" हेल्दी स्किन हल्की एसिडिक होती है, उसका pH 5.4 से 5.9 होता है। केरल की एक स्टडी में नहाने के 64 साबुन टेस्ट किए गए। उनमें से 53 का pH 9 से 10 निकला। सिर्फ़ दो स्किन से मेल खाते थे। एंटी-एक्ने और आयुर्वेदिक साबुन भी बेहतर नहीं निकले। एक दूसरा भारतीय रिव्यू कहता है कि pH से ज़्यादा ये मायने रखता है कि सफ़ाई करने वाला एजेंट किस तरह का है। दोनों इस पर सहमत हैं कि साबुन अक्सर स्किन को रूखा और इरिटेट करता है। एक सही फेस वॉश आसान हल है।
"ऑयली स्किन को ज़्यादा धोना चाहिए और मॉइस्चराइज़र नहीं लगाना चाहिए।" AAD कहता है कि तेज़ फेस वॉश स्किन को इरिटेट कर सकता है और और ज़्यादा तेल बनवा सकता है। ये भी कहता है कि ऑयली स्किन पर भी "मॉइस्चराइज़र लगाना अब भी ज़रूरी है"। अपनी स्किन टाइप के लिए बना हल्का मॉइस्चराइज़र चुनिए। THERŌ मॉइस्चराइज़र रेंज के दोनों मॉइस्चराइज़र हल्के हैं।
"नींबू और टूथपेस्ट से सब ठीक हो जाता है।" हर परिवार में एक चाचा होते हैं जिनके पास कोई नुस्खा होता है, और उनकी नीयत अच्छी होती है। लेकिन स्किन पर नींबू का रस और फिर धूप, फफोले वाला रैश दे सकते हैं। DermNet कहता है कि इससे बचे गहरे निशान सालों तक रह सकते हैं और भूरी स्किन पर और बुरे हो सकते हैं। रही टूथपेस्ट की बात, तो AAD के डॉक्टर कहते हैं कि ये पिंपल्स से नहीं लड़ता और स्किन को नुकसान पहुँचा सकता है।
"टैन को रगड़कर निकाल दो।" ज़ोर से स्क्रब करना उल्टा पड़ सकता है। AAD चेतावनी देता है कि ज़्यादा रगड़ने से गहरे रंग की स्किन पर डार्क स्पॉट्स पड़ सकते हैं। डल स्किन के लिए THERŌ के पास ज़्यादा नरम ऑप्शंस हैं।
"केमिस्ट की क्रीम सब संभाल लेगी।" ये गंभीर बात है। 12 भारतीय स्किन क्लिनिक्स की एक स्टडी में चेहरे की समस्याओं वाले 2,926 मरीज़ों की जाँच हुई। उनमें से 433 चेहरे पर स्टेरॉयड क्रीम लगा रहे थे। लगभग 29% इसे फ़ेयरनेस क्रीम, आम क्रीम या आफ़्टर-शेव क्रीम की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। उनमें से किसी ने डॉक्टर की सलाह नहीं ली थी। 90.5% यूज़र्स पर साइड इफ़ेक्ट्स हुए, और सबसे आम था एक्ने। डॉक्टर न कहे, तो चेहरे पर कभी स्टेरॉयड क्रीम मत लगाइए।
स्किनकेयर रूटीन को असर दिखाने में कितना समय लगता है?
स्किन धीमी है। नए सेल्स को सतह तक आने में लगभग एक महीना लगता है। इसलिए एक हफ़्ते में कुछ असली नहीं बदलता। पिंपल्स के लिए AAD कहता है कि किसी प्रोडक्ट को कम से कम चार हफ़्ते दीजिए। साफ़ होने में दो से तीन महीने या ज़्यादा लग सकते हैं। डार्क स्पॉट्स और भी धीमे हैं। AAD कहता है कि आपकी स्किन से कुछ शेड गहरा स्पॉट आम तौर पर 6 से 12 महीने में फ़ीका पड़ता है। पिंपल वाली स्किन के प्रोडक्ट्स को भी इतना ही सब्र चाहिए।
डर्मेटोलॉजिस्ट को कब दिखाना चाहिए?
स्किनकेयर प्रोडक्ट्स कॉस्मेटिक्स हैं। ये स्किन को बेहतर दिखने में मदद करते हैं। ये बीमारी का इलाज नहीं करते। डर्मेटोलॉजिस्ट, यानी स्किन के डॉक्टर को दिखाइए, अगर:
- आपको स्किन के अंदर गहरे, बड़े और दर्द वाले पिंपल्स होते हैं, या ऐसे पिंपल्स जो निशान छोड़ जाते हैं। AAD कहता है कि दुकान वाले प्रोडक्ट्स इन पर शायद काम नहीं करेंगे।
- दो से तीन महीने लगातार इस्तेमाल के बाद भी पिंपल्स साफ़ नहीं हुए।
- पिंपल ठीक होने के बहुत बाद तक डार्क स्पॉट्स बने रहते हैं।
- आपको छोटे, खुजली वाले, एक जैसे साइज़ के दाने हैं जिन पर कोई पिंपल प्रोडक्ट असर नहीं करता। 2025 का एक मेडिकल रिव्यू कहता है कि एक फ़ंगल स्किन समस्या को अक्सर एक्ने समझ लिया जाता है। ये पुरुषों में और गर्म मौसम वाली जगहों पर ज़्यादा होती है।
- आपको खुजली वाला रैश है और शक है कि ये दाद है। भारतीय डर्मेटोलॉजिस्ट्स ने फ़ंगल इन्फ़ेक्शन में तेज़ उछाल के बारे में लिखा है, जिसे स्टेरॉयड क्रीम्स ने और बिगाड़ा है।
- आपको कोई नया स्पॉट या तिल दिखे जिसमें खुजली हो, खून आए या उसका रंग बदले।
पुरुषों का स्किनकेयर रूटीन: आम सवाल
स्किन केयर की 5 बेसिक बातें क्या हैं?
पाँच की कोई ऑफ़िशियल लिस्ट नहीं है। पुरुषों के लिए AAD की सलाह इसके सबसे क़रीब है। अपना स्किन टाइप जानिए। रोज़ चेहरा धोइए। ध्यान से शेव कीजिए। रोज़ मॉइस्चराइज़ कीजिए। बाहर जाएँ, तो सनस्क्रीन लगाइए।
स्किनकेयर में 4-2-4 रूल क्या है?
ये चेहरा धोने का एक कोरियन तरीक़ा है। आप चार मिनट ऑयल क्लेंज़र से मसाज करते हैं, फिर दो मिनट फ़ोम क्लेंज़र से, फिर चार मिनट तक धोते हैं। Bustle के 2015 के एक आर्टिकल में इसकी शुरुआत सिंगर सूज़ी से जोड़ी गई है। लिखने वाली ने इसे एक हफ़्ते आज़माया और बताया कि स्किन और ख़राब हो गई। ट्रेन पकड़ने वाले आदमी से सिंक पर दस मिनट माँगना कुछ ज़्यादा है।
स्किनकेयर के 7 स्टेप्स क्या हैं, और कोरियन 7 स्किन मेथड क्या है?
7 स्टेप्स की कोई स्टैंडर्ड लिस्ट नहीं है। मशहूर लंबा रूटीन कोरियन 10-स्टेप वाला है, जिसे Cleveland Clinic ने पूरा लिस्ट किया है। ये दो क्लेंज़र से शुरू होकर टोनर, एसेंस, सीरम और शीट मास्क से होते हुए सनस्क्रीन तक जाता है। "7 स्किन मेथड" अलग चीज़ है। Refinery29 इसे एक ही बार में टोनर की सात परतें थपथपाकर लगाना बताता है। कोई स्टडी इसे सपोर्ट नहीं करती। पुरुषों को दोनों में से किसी की ज़रूरत नहीं।
पुरुषों को 7 दिन में ग्लोइंग स्किन कैसे मिले?
नहीं मिल सकती, क्योंकि नई स्किन आने में लगभग एक महीना लगता है। एक हफ़्ता फ़्रेश दिखने के लिए काफ़ी है। AAD कहता है कि मॉइस्चराइज़र पानी को रोकता है, जिससे स्किन ज़्यादा ब्राइट दिख सकती है। जिस स्किन को हाइड्रेशन चाहिए, उसके प्रोडक्ट्स यहाँ फ़िट बैठते हैं।
कोरियन ग्लास स्किन कैसे पाएँ?
WebMD ग्लास स्किन को साफ़, ब्राइट स्किन बताता है जो लगभग पारदर्शी दिखती है। ये ऐसे परफ़ॉर्मर्स और मॉडल्स की बात करता है जिनके पोर्स दिखते ही नहीं, और इस लुक को "समय और पैसे का कमिटमेंट" कहता है। वो स्टूडियो लाइट्स के नीचे के परफ़ॉर्मर्स हैं। आप ट्यूबलाइट के नीचे खड़े एक आदमी हैं। इसकी जगह साफ़, ईवन स्किन का लक्ष्य रखिए।
ग्लोइंग स्किन के लिए नंबर 1 फल कौन सा है?
कोई फल नंबर एक साबित नहीं हुआ है। विटामिन C के लिए भारत की ऑफ़िशियल फ़ूड टेबल्स आँवले में 252 mg प्रति 100 g बताती हैं। अमरूद में 214 से 222 mg है। संतरे में लगभग 43 mg। स्कॉटलैंड के 35 छात्रों पर छह हफ़्ते की एक स्टडी ने ज़्यादा फल और सब्ज़ियों को ज़्यादा हेल्दी स्किन टोन से जोड़ा। उनमें से लगभग सभी यूरोपीय मूल के थे। 2017 का एक रिव्यू कहता है कि फल का कौन सा हिस्सा मदद करता है, ये अभी पता नहीं है। फिर भी अमरूद खाइए।
तो पुरुषों के लिए सही स्किनकेयर रूटीन क्या है?
चार स्टेप। क्लेंज़, ट्रीट, मॉइस्चराइज़, प्रोटेक्ट। सुबह चारों, रात को तीन।
अपनी मुख्य समस्या के हिसाब से प्रोडक्ट चुनिए और उन्हें एक महीना दीजिए। नींबू, टूथपेस्ट और केमिस्ट की क्रीम छोड़िए। सनस्क्रीन लगाइए, तब भी जब जून की चिपचिपी दोपहर में उसे छोड़ने का मन करे।
शुरुआत के लिए कोई जगह चाहिए, तो THERŌ बेस्टसेलर्स पहले से तीसरे स्टेप तक कवर करते हैं। आज रात बस एक काम कीजिए। साबुन की टिकिया को चेहरे की ड्यूटी से रिटायर कर दीजिए।
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