ऑयली स्किन के लिए बार साबुन नहीं, फेस वॉश इस्तेमाल करें। बार साबुन एल्कलाइन (alkaline) होता है, यानी आपकी स्किन की हल्की एसिडिक सतह का ठीक उल्टा, और ये वो तेल भी निकाल देता है जिनसे आपकी स्किन बैरियर ठीक से काम करती है। ऑयली स्किन के लिए बना एक माइल्ड फेस वॉश, दिन में दो बार, बिना ये नुकसान किए एक्स्ट्रा तेल हटा देता है।
पुणे का एक PG, सुबह के 7.10 बजे हैं। बाथरूम की पट्टी पर साबुन की एक टिकिया रखी है। वही बाल धोती है, बॉडी भी, चेहरा भी, और किसी बुरे दिन बाथरूम की टाइलें भी।
आप उसी से चेहरा धोते हैं। दस मिनट तक स्किन टाइट और एकदम चमचमाती साफ़ लगती है। ऑफ़िस पहुँचते-पहुँचते माथा फिर से चमकने लगता है। तो आप लंच पर फिर धोते हैं। और निकलने से पहले एक बार और।
शाम तक आप चार बार चेहरा धो चुके होते हैं। स्किन में जलन-सी है, और वो अब भी ऑयली है। इस प्लान में कुछ तो गड़बड़ है।
छोटा जवाब
चेहरे पर फेस वॉश लगाएँ। साबुन बॉडी के लिए रखें। बार साबुन एल्कलाइन होता है और स्किन का तेल बहुत ज़्यादा निकाल देता है। इससे ऑयली स्किन पहले टाइट हो जाती है, फिर कुछ ही घंटों में दोबारा चमकने लगती है। ऑयली स्किन के लिए बना एक माइल्ड फेस वॉश, दिन में दो बार, बिना नुकसान के एक्स्ट्रा तेल साफ़ कर देता है। इससे ज़्यादा बार धोने से कोई फ़ायदा नहीं होता।
पुरुषों की स्किन इतनी ऑयली क्यों होती है?
आपकी स्किन एक तेल बनाती है जिसे सीबम (sebum) कहते हैं। ये सतह के नीचे की छोटी-छोटी ग्रंथियों से आता है। ऑयली स्किन पर 2017 का एक रिव्यू कहता है कि ये ग्रंथियाँ चेहरे, छाती और ऊपरी पीठ पर ज़्यादा होती हैं। मेल हार्मोन, ख़ासकर टेस्टोस्टेरोन और उसका ज़्यादा तेज़ रूप DHT, तय करते हैं कि ये ग्रंथियाँ कितना सीबम बनाएँगी। इसीलिए पुरुष औरतों से ज़्यादा सीबम बनाते हैं।
गर्मी इसे और बढ़ाती है। वही रिव्यू बताता है कि गर्मियों में और नमी वाले मौसम में सीबम ज़्यादा बनता है। 20 से 59 साल के 100 कोरियाई पुरुषों पर हुई एक स्टडी ने उन्हीं पुरुषों को गर्मी और सर्दी, दोनों में मापा। "सीबम की मात्रा सर्दी के मुक़ाबले गर्मी में ज़्यादा थी", और गर्मियों में उनके पोर्स भी ज़्यादा दिखते थे। अगर आप मुंबई या चेन्नई में रहते हैं, तो आप जानते हैं कि वो गर्मी कितनी लंबी चलती है।
अब वो हिस्सा जो साबुन के लिए मायने रखता है। आपकी स्किन की सबसे ऊपरी परत ईंटों की दीवार जैसी काम करती है। स्किन सेल्स ईंटें हैं। नैचुरल तेल और फ़ैट उनके बीच का गारा (मसाला) हैं। ये दीवार पानी को अंदर रखती है और धूल व कीटाणुओं को बाहर। Molecules जर्नल में 2022 का एक रिव्यू कहता है कि स्किन की सतह हल्की एसिडिक होती है। इसका pH "4.0 और 6.0 के बीच" रहता है। pH स्केल एसिड और एल्कली को मापता है। पानी 7 पर है, बीच में। रिव्यू कहता है कि स्किन पर कोई एल्कलाइन प्रोडक्ट लगाएँ, तो उससे "ज़्यादातर मामलों में कई नेगेटिव असर" होते हैं।
यही हल्का एसिड, और उसके साथ आने वाला तेल, वो चीज़ है जिसका ऑयल कंट्रोल को ध्यान रखना चाहिए। आपको कम चमक चाहिए, टूटी हुई दीवार नहीं।

साबुन बनाम फेस वॉश: फ़र्क क्या है?
बार साबुन फ़ैट और एक एल्कली से बनता है। Indian Journal of Dermatology में 2011 का एक रिव्यू इसका pH "9 और 10 के बीच" बताता है। स्किन के लिए ये स्केल का ग़लत सिरा है। रिव्यू कहता है कि साबुन से अक्सर ड्राइनेस और जलन होती है। साथ ही, एल्कलाइन साबुन स्किन की सबसे ऊपरी परत की फ़ैट वाली लेयर को नुकसान पहुँचाता है। Molecules वाला रिव्यू जोड़ता है कि तेज़ साबुन धोते वक़्त स्किन से प्रोटीन और फ़ैट खींच लेते हैं। धोने के बाद भी थोड़ा साबुन स्किन पर रह जाता है।
तो गारा चला गया। दीवार से पानी रिसने लगता है, और स्किन टाइट लगती है। तेल की ग्रंथियाँ पहले की तरह काम करती रहती हैं, तो दोपहर तक चमक लौट आती है, वो भी टाइट स्किन के ऊपर। यानी दोनों तरफ़ से नुकसान।
फेस वॉश एक अलग प्रोडक्ट है। ज़्यादातर फेस वॉश सिंडेट (syndet) होते हैं, यानी सिंथेटिक डिटर्जेंट। भारतीय रिव्यू कहता है कि सिंडेट्स का "pH न्यूट्रल या हल्का एसिडिक होता है", ये कम जलन करते हैं और "साबुन जैसी मैल की परत नहीं बनाते"। ये आख़िरी बात यहाँ मायने रखती है। अगर आपके बाथरूम की बाल्टी पर सफ़ेद परत जमी है, तो आपका पानी हार्ड है। UK में 80 लोगों पर 2018 की एक स्टडी में पाया गया कि हार्ड पानी स्किन पर ज़्यादा डिटर्जेंट छोड़ता है। इन जमावों ने "स्किन से पानी का निकलना बढ़ाया और जलन पैदा की"। इस स्टडी का पैसा एक वॉटर सॉफ़्टनर कंपनी ने दिया था, तो इसे इसी बात को ध्यान में रखकर पढ़ें। टैंकर का पानी आप सॉफ़्ट नहीं कर सकते। पर आप साफ़ धुल जाने वाला फेस वॉश ज़रूर चुन सकते हैं।
| बार साबुन | ऑयली स्किन के लिए फेस वॉश | |
|---|---|---|
| pH | 9 से 10, एल्कलाइन | न्यूट्रल से हल्का एसिडिक, स्किन के क़रीब |
| क्या हटाता है | गंदगी, तेल, और स्किन का अपना फ़ैट और प्रोटीन | गंदगी और एक्स्ट्रा तेल |
| धोने के बाद | टाइट, चमचमाती, फिर से ऑयली | साफ़, बिना टाइटनेस के |
| हार्ड पानी में | मैल की परत छोड़ता है | मैल की कोई परत नहीं |
इसका मतलब ये नहीं कि साबुन कोई विलेन है। Mintel के 2023 के सर्वे में पाया गया कि "90% भारतीय ग्राहकों" के लिए नहाने-धोने का मुख्य तरीक़ा बार साबुन ही है। बॉडी के लिए टिकिया बढ़िया है। चेहरा कभी उसका काम था ही नहीं।
ऑयली स्किन वाले फेस वॉश में क्या होना चाहिए?
शुरुआत American Academy of Dermatology की सलाह से करें। "माइल्ड, झाग वाला फेस वॉश ज़रूर इस्तेमाल करें।" "ऑयल-बेस्ड या अल्कोहल-बेस्ड क्लींज़र इस्तेमाल न करें।" और ऐसे प्रोडक्ट चुनें जिन पर "oil free" और "noncomedogenic" लिखा हो, यानी ऐसे बने कि पोर्स बंद न करें।
फिर एक्टिव्स देखें। THERŌ के Active Oil Control फेस वॉश में तीन हैं। नियासिनामाइड (Niacinamide), जो विटामिन B3 का एक रूप है। सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid)। ग्लाइकोलिक एसिड (Glycolic Acid)। सैलिसिलिक एसिड पोर्स को गहराई से साफ़ करता है और ब्रेकआउट्स से लड़ने में मदद करता है, उस जमाव को धो देता है जो उन्हें बंद करता है। ग्लाइकोलिक एसिड डेड स्किन और जमाव को हल्के से एक्सफ़ोलिएट करता है। नियासिनामाइड एक्स्ट्रा तेल को कंट्रोल करने में मदद करता है, ताकि हर बार धोने के बाद स्किन फ़्रेश और साफ़ दिखे। ब्रांड के कंज़्यूमर रिज़ल्ट्स में 98% यूज़र्स ने कहा कि उन्हें साफ़ महसूस हुआ, ड्राई या रूखा नहीं।
नियासिनामाइड पर एक ईमानदार बात। इसका सबसे मज़बूत सबूत उन प्रोडक्ट्स में है जिन्हें आप स्किन पर लगा छोड़ देते हैं। 100 जापानी वयस्कों पर 2006 की एक स्टडी में 4 हफ़्ते तक 2% नियासिनामाइड वाला मॉइस्चराइज़र इस्तेमाल किया गया। नियासिनामाइड वाले ग्रुप में 2 हफ़्ते पर और 4 हफ़्ते पर, प्लेसिबो ग्रुप के मुक़ाबले सीबम निकलने की दर कम थी। इसीलिए समय के साथ तेल पर सीरम वाला स्टेप किसी भी वॉश से ज़्यादा असर करता है। नियासिनामाइड फेस वॉश वाला आर्टिकल इस पर और गहराई से बात करता है।
अगर आपकी बड़ी चिंता चमक नहीं, बल्कि टैन और बेजान स्किन है, तो Vitamin C फेस वॉश उसी तरह साफ़ करता है और स्किन को ब्राइट भी करता है। दोनों 3X Action Face Wash फ़ॉर्मूला हैं।

ऑयली स्किन वाले पुरुषों को दिन में कितनी बार चेहरा धोना चाहिए?
दिन में दो बार, और ख़ूब पसीना आने के बाद एक बार और। AAD की फेस वॉशिंग गाइड इसे एक लाइन में कहती है: "दिन में दो बार और पसीना आने के बाद ही चेहरा धोएँ।"
इस पर एक ट्रायल हुआ है। Pediatric Dermatology में 2006 की एक स्टडी में हल्के से मध्यम एक्ने वाले पुरुष लिए गए। उन्होंने 6 हफ़्ते तक एक माइल्ड फेस वॉश से दिन में एक, दो या चार बार चेहरा धोया। कुल मिलाकर ग्रुप्स में कोई बड़ा फ़र्क नहीं था। दिन में दो बार वाले ग्रुप में ब्लैकहेड्स और छोटे दानों में सुधार हुआ। दिन में एक बार वाले ग्रुप की हालत बिगड़ी, लालिमा और सूजे हुए दाने बढ़े। दिन में चार बार धोना दो बार से बेहतर नहीं निकला। लेखकों को दिन में दो बार के लिए "थोड़ा समर्थन" मिला। वो एक्ने वाले अमेरिकी पुरुष थे, चमक वाले भारतीय पुरुष नहीं, पर सबक यहाँ भी लागू होता है। दो बार धोएँ, ध्यान से।
ये रहा पूरा रूटीन, ब्रांड के चार स्टेप्स में।
सुबह
- क्लींज़। चेहरे को गुनगुने पानी से गीला करें। Active Oil Control फेस वॉश की सिक्के जितनी मात्रा लेकर मसाज करते हुए झाग बनाएँ। उँगलियों के सिरों से, 30 सेकंड तक। धो लें और थपथपाकर सुखाएँ।
- ट्रीट। साफ़ चेहरे और गर्दन पर नियासिनामाइड सीरम की 3 से 5 बूँदें लगाएँ। इसमें 5% नियासिनामाइड है और ये एक्स्ट्रा तेल को कंट्रोल करने और पोर्स को छोटा दिखाने में मदद करता है।
- मॉइस्चराइज़। AAD कहता है कि क्लींज़ करने के बाद मॉइस्चराइज़र लगाएँ, ऑयली स्किन पर भी। सैलिसिलिक एसिड वाला हल्का मॉइस्चराइज़र इस्तेमाल करें। इसमें DustShield™ भी है, जो PM2.5 जैसे बेहद बारीक प्रदूषण कणों के ख़िलाफ़ एक बैरियर है।
- प्रोटेक्ट। निकलने से पहले सनस्क्रीन। AAD कहता है कि बाहर जाते समय इसे लगाएँ। कोई भी ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे ज़्यादा, जिसे आप रोज़ लगाएँगे।
रात
- उसी तरह क्लींज़ करें। ये वॉश दिन भर का तेल, पसीना और रास्ते की धूल हटा देता है।
- सीरम, फिर मॉइस्चराइज़र। सनस्क्रीन छोड़ दें।
जिम या लंबी राइड के बाद: एक एक्स्ट्रा वॉश, फिर मॉइस्चराइज़र। बस, इतना ही। बाक़ी बातें वर्कआउट के बाद वाली गाइड में हैं।

साबुन और ऑयली स्किन के साथ पुरुष जो ग़लतियाँ करते हैं
हर चीज़ के लिए एक ही टिकिया। बाल, बॉडी, चेहरा, और कभी-कभी बाथरूम की टाइलें भी। आपकी बॉडी एल्कलाइन टिकिया झेल सकती है। आपका चेहरा नहीं, जैसा ऊपर वाला भारतीय रिव्यू दिखाता है। चेहरे को उसका अपना वॉश दें।
दिन में पाँच बार चेहरा धोना। भारतीय रिव्यू इसे एक मिथक कहता है। तेल कम करने के लिए दिन में कई बार साबुन और पानी से रगड़ने से "एक्ने बस और बढ़ता है"। इस नतीजे का एक नाम भी है, acne detergicans। सही गिनती माइल्ड फेस वॉश वाली गाइड में है।
वॉशक्लॉथ या लूफ़ा से रगड़ना। AAD कहता है कि उँगलियों के सिरों के अलावा कुछ भी "आपकी स्किन में जलन कर सकता है"। रगड़ने से तेल जल्दी नहीं निकलता। गारा निकलता है।
स्किन ऑयली है, इसलिए मॉइस्चराइज़र छोड़ देना। AAD क्लींज़ करने के ठीक बाद मॉइस्चराइज़र लगाने को कहता है। रूखी हुई स्किन टाइट लगती है और फिर भी चमकती है। ऑयली स्किन के लिए बना हल्का मॉइस्चराइज़र टाइटनेस ख़त्म कर देता है। ऑयली स्किन के मॉइस्चराइज़र वाला आर्टिकल बताता है क्यों।
"पोर्स बंद करने" के लिए ठंडा पानी। जून की सुबह ठंडा पानी अच्छा लगता है, और फ़ायदा बस इतना ही है। AAD चेहरा धोने के लिए गुनगुना पानी कहता है। पोर्स तापमान से खुलते-बंद नहीं होते।
चेहरे का तेल सुखाने के लिए दो लीटर एक्स्ट्रा पानी। हर परिवार में एक अंकल होते हैं जो यही नुस्ख़ा देते हैं। छह स्टडीज़ के 2018 के एक रिव्यू ने पानी पीने और स्किन के रिश्ते को देखा। उसने सबूत को "मात्रा और तरीक़े की क्वालिटी, दोनों में कमज़ोर" कहा। ज़्यादा पानी से स्किन की नमी थोड़ी बढ़ी। सीबम से इसका रिश्ता "साफ़ नहीं" था। पानी अपनी बॉडी के लिए पिएँ। ये उम्मीद न रखें कि इससे आपकी तेल की ग्रंथियाँ बंद हो जाएँगी।
जल्दी नतीजे के लिए केमिस्ट से स्टेरॉयड या "फ़ेयरनेस" क्रीम। ये मिथक नहीं, ख़तरा है। 12 भारतीय डर्मेटोलॉजी सेंटर्स में हुई 2011 की एक स्टडी ने चेहरे की स्किन की दिक़्क़त वाले 2,926 मरीज़ों की जाँच की। इनमें से 433 स्टेरॉयड क्रीम लगा रहे थे, ज़्यादातर बिना डॉक्टर की सलाह के। "TC इस्तेमाल करने वाले 392 (90.5%) लोगों में" साइड इफ़ेक्ट्स दिखे, और सबसे आम था एक्ने या बढ़ा हुआ एक्ने। काउंटर से मिलने वाली कोई क्रीम इसके लायक नहीं।
डिनर को दोष देना। दानों में खाने का थोड़ा रोल है, चमक में नहीं। 34 स्टडीज़ के 2022 के एक सिस्टमैटिक रिव्यू ने हाई ग्लाइसेमिक खाने को देखा। यानी सफ़ेद चावल, मैदा और चीनी वाली चीज़ें। इनका "एक्ने बढ़ाने वाला असर मामूली पर साफ़" है। आसान शब्दों में, ये एक्ने को थोड़ा बढ़ा सकते हैं। डेयरी के सबूत "मिले-जुले" थे, और डेयरी का रिश्ता "सिर्फ़ पश्चिमी आबादी में" दिखा। इस पर और बातें पिंपल्स वाली गाइड में हैं।
स्किन कम ऑयली महसूस होने में कितना वक़्त लगता है?
फेस वॉश उसी पल काम करता है जब आप उसे लगाते हैं, और उसका असर घंटों रहता है, दिनों नहीं। ये सतह पर पहले से मौजूद तेल हटाता है। ये नहीं बदल सकता कि आपकी ग्रंथियाँ कितना तेल बनाती हैं। फेस वॉश आपके हार्मोन्स से मोलभाव नहीं कर सकता।
लगाकर छोड़ने वाले प्रोडक्ट हफ़्तों में ये मात्रा बदल सकते हैं। ऊपर वाली जापानी स्टडी में 2% नियासिनामाइड ने हफ़्ते 2 तक सीबम निकलने की दर कम की, और हफ़्ते 4 पर फिर से। नियासिनामाइड सीरम की यही ईमानदार टाइमलाइन है: कुछ हफ़्तों का रोज़ इस्तेमाल, एक बार धोना नहीं।
मौसम भी इसे बदलता है। कोरियाई पुरुषों ने गर्मी के मुक़ाबले सर्दी में कम सीबम बनाया। और 2017 का रिव्यू कहता है कि पुरुषों में सीबम साठ की उम्र में कम होता है। तो हाँ, ऑयली स्किन नॉर्मल हो सकती है। साठ की उम्र में।
डर्मेटोलॉजिस्ट को कब दिखाएँ
- गहरे, दर्द वाले या सिस्टिक दाने, या कोई भी दाना जो गड्ढा या निशान छोड़ जाए। इनके लिए दूसरा वॉश नहीं, प्रिस्क्रिप्शन वाला इलाज चाहिए।
- माथे, छाती या पीठ पर छोटे, खुजली वाले लाल दाने और पस वाले दाने, जो नमी वाले मौसम में बढ़ते हैं और एक्ने प्रोडक्ट्स से फ़र्क नहीं पड़ता। Journal of Drugs in Dermatology में 2026 का एक रिव्यू कहता है कि ये Malassezia folliculitis हो सकता है, बालों की जड़ों का एक यीस्ट इंफ़ेक्शन जिसे "अक्सर ग़लती से" एक्ने "समझ लिया जाता है"। सही जाँच के बाद इसमें एंटीफ़ंगल इलाज चाहिए। एंटीफ़ंगल क्रीम ख़ुद से शुरू न करें।
- किसी भी नए प्रोडक्ट के बाद जलन, स्किन उतरना या रैश। प्रोडक्ट बंद करें और दिखवाएँ।
- एक नियमित रूटीन के 8 से 12 हफ़्ते बाद भी तेल या ब्रेकआउट्स में सुधार न हो।
- जल्दी नतीजे के लिए केमिस्ट से स्टेरॉयड क्रीम या "फ़ेयरनेस" क्रीम बिना प्रिस्क्रिप्शन के कभी इस्तेमाल न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ऑयली स्किन वाले पुरुषों के लिए सबसे अच्छा साबुन कौन-सा है?
चेहरे के लिए, कोई नहीं। बार साबुन का pH 9 से 10 होता है और ये स्किन का अपना फ़ैट निकाल देता है, तो ऑयली स्किन पहले टाइट होती है और फिर से चमकने लगती है। इसकी जगह सैलिसिलिक एसिड और नियासिनामाइड वाला ऑयली स्किन के लिए बना फेस वॉश इस्तेमाल करें। साबुन बॉडी के लिए रखें।
क्या ऑयली स्किन नॉर्मल हो सकती है?
सालों में, हाँ। सीबम मेल हार्मोन्स से तय होता है, इसलिए ये बीस और तीस की उम्र में ज़्यादा रहता है और साठ में कम होता है। मौसम भी इसे बदलता है, सर्दी में तेल कम होता है। रोज़मर्रा में, नियासिनामाइड सीरम वाला रूटीन एक्स्ट्रा तेल को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, पर ये आपका स्किन टाइप नहीं बदलेगा।
क्या पानी पीने से चेहरे का तेल कम होता है?
अब तक किसी स्टडी में नहीं। छह स्टडीज़ के 2018 के एक रिव्यू में पानी पीने और सीबम का रिश्ता "साफ़ नहीं" निकला। एक्स्ट्रा पानी से स्किन की नमी थोड़ी बढ़ी, ज़्यादातर उन लोगों में जो बहुत कम पानी पी रहे थे। पानी अपनी सेहत के लिए पिएँ, अपने माथे के लिए नहीं।
कौन-से खाने ऑयली स्किन कम करने में मदद करते हैं?
कोई भी खाना सीबम कम करता नहीं दिखा है। पिंपल्स के लिए, 2022 के एक रिव्यू में हाई ग्लाइसेमिक खाने का एक्ने बढ़ाने वाला मामूली असर मिला। चीनी, मैदा और सफ़ेद चावल आम उदाहरण हैं। इनमें से कुछ की जगह दाल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज लेना पिंपल्स के लिए एक समझदार दाँव है। चमक का इलाज ये नहीं है।
क्या ठंडा पानी ऑयली स्किन के लिए अच्छा है?
अच्छा लगता है, और बस यही करता है। AAD चेहरा धोने के लिए गुनगुना पानी कहता है, उँगलियों के सिरों से और बिना रगड़े। पानी का तापमान ये नहीं बदलता कि आपकी ग्रंथियाँ कितना तेल बनाती हैं।
पुरुष ऑयली स्किन को कैसे रोक सकते हैं?
आप इसे रोक नहीं सकते, पर कंट्रोल कर सकते हैं। दिन में दो बार सैलिसिलिक एसिड वाले फेस वॉश से चेहरा धोएँ। इसके बाद नियासिनामाइड सीरम और एक हल्का ऑयल कंट्रोल मॉइस्चराइज़र लगाएँ। सनस्क्रीन लगाएँ। शाम 4 बजे की चमक के लिए ब्लॉटिंग पेपर साथ रखें। AAD भी इन्हें गिनाता है।
आख़िरी बात: ऑयली स्किन के लिए साबुन या फेस वॉश?
फेस वॉश। हर बार। बार साबुन एल्कलाइन होता है, स्किन का अपना फ़ैट निकाल देता है, और ऑयली चेहरे को पहले टाइट, फिर से चमकदार छोड़ देता है। सैलिसिलिक एसिड और नियासिनामाइड वाला माइल्ड फेस वॉश एक्स्ट्रा तेल साफ़ करता है और दीवार को खड़ा रहने देता है।
आज रात: Active Oil Control फेस वॉश से चेहरा धोएँ, थपथपाकर सुखाएँ, सीरम की 3 से 5 बूँदें, एक हल्का मॉइस्चराइज़र। कल सुबह यही, साथ में सनस्क्रीन। टिकिया रखिए। उसे बॉडी के लिए दीजिए। अगर एक ही प्रोडक्ट से शुरू करना चाहते हैं, तो बेस्टसेलर्स देखिए।
संदर्भ
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